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Abhilasha Deshpande

Inspirational

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Abhilasha Deshpande

Inspirational

कही रुप कही छांव

कही रुप कही छांव

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कहीं शहर कहीं गांव, 

रिश्तो के उखड़े पांव।

फिर नहीं कहीं ठाव,

 कहीं धूप कहीं छांव।


सुख-दुख का सफर, 

धूप छांव के है डगर। 

दौड़ती न कागजी नाव, 

कहीं धूप कहीं छांव।


है भगवान के माया 

कहीं धूप कहीं छाया 

कहीं प्रकृति ने रुलाया 

कभी सबको हंसाया। 

आए प्रेम के जगाए भाव, 

कहीं धूप कहीं छांव।


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