कभी सोचा न था...
कभी सोचा न था...
कभी सोचा न था....
ज़िंदगी यूं कलम बन जाएगी
कभी कागज़ों पर सजाई जाएगी
कभी मेरे अल्फाजों का रूप ले लेगी
कभी दफ्न कर एहसासों को किताबों को महकाएगी।
जिंदगी यूं बहुत कुछ सिखा जाएगी
अल्फाजों से खेलना
दर्द को अल्फाजों का मरहम देना
समझना हर कण को
उनके मन को
ज़िंदगी को आमसे अलग कुछ ख़ास दिखाएगी।
लिखने की कला हमें भी आएगी
जुनून क्या होता है बता जाएगी
दर्द के हर कतरे को खूबसूरती से परोसना कुछ खाली पन्नों पर
खुशियों को खयालों के बादलों पर
सवार होकर जिंदगी के आसमां पर उड़ना सिखाएगी।
