कैसे कहुं
कैसे कहुं
कैसे कहूँ कि मेरे लिए क्या हो तुम ?
बोलूँ किनारे तो मेरे अल्फ़ाज़ हो तुम,
सुनूं हथियार तो मेरे दिल की आवाज हो तुम।
देखूं आंखें तो मेरी आंखों में बसे ख्वाब हो तुम,
कैसे कहूँ की मेरे लिए क्या हो तुम ?
रात के अँधेरे में चाँद और
दिन की कड़कती धूप में सोना हो तुम।
एक अंधेरी गुफा में चिलमिलाती
रोशनी का एहसास हो तुम,
कैसे कहूं की मेरे लिए क्या हो तुम ?

