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Abhay kumar Singh

Abstract

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Abhay kumar Singh

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कैसे कह दूँ थक गया हूँ मैं

कैसे कह दूँ थक गया हूँ मैं

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कैसे कह दूँ थक गया हूँ मैं

न जाने किस किस का हौसला हूँ मैं,

सपने संयोजे बैठे कईयो ने

कैसे कह दूँ रुक गया हूँ मैं


संघर्ष किया तो पाया क्या भी

पाया भी तो खाया क्या भी,

जो खाया सो भूल गया हूँ

पर कैसे कह दूँ हारा हूँ मैं


संघर्ष की वो धुधंली कहानी

दिखती है जो परछाई में

उसे रोक कर बोला हूँ मैं

कैसे कह दूँ थक गया हूँ मैं


मेरी आवाज को सुनने को

अपनी अवाम जो बैठी है

उन अवाम की सपनों को

पूरा करने जो बैठा हूँ मैं

कैसे कह दूँ थक गया हूँ मैं

न जाने किस किस का हौसला हूँ मैं।


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