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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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कैनवास

कैनवास

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धर्म को मानने वाले,

 मानवता से,

 जुदा रह सकते हैं।

धर्म की मानने वाले, 

मानवता से , 

जुदा कैसे रह सकते हैं।

________________

जिंदगी में कुछ तो कम है, 

 दरमियां बहुत से गम हैं।

दरारें भी नहीं कुछ कम है ।

फैसलों में ही सिर्फ़ दम है ।

_____________________

कोरे कैनवास पर,

भावों को समेटने के लिए,  

जैसे ही ब्रश उठाया। 

रंगों का काम,

आंसुओं ने कर दिखाया।


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