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Vaishali Gulsia

Romance

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Vaishali Gulsia

Romance

काश

काश

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थक जाती हूं अकेले जब,

चलते -चलते जीवन पथ पर।

तब फिर जुड़ जाता है एक काश!

काश! तुम होते साथ में।

तो कुछ पल रख लेती सिर

तुम्हारी गोद में और,

बहने देती अविरल अश्रु धारा को,

जिसके साथ बह जाने देती,

सभी अवसाद और थकान को,

और मिल जाती फिर से नई ताजगी,

और उमंग मंजिल तक पहुंचने की।।

और कभी जब मिलती हैं, खुशियां अपार

तब फिर जुड़ जाता हैं एक काश!

काश! कि तुम होते साथ में,

बाँट लेते इन खुशियों को,

सम्भल लेते मुझे और फिर,

सिखाते जीवन का नया पाठ यही,

क्षणिक सफलता से मत विचलित होना।

मत देना विराम अपने सपनों को क्योंकि,

तुम्हें तो छूनी है बुलंदी आसमानों की।।



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