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Ritesh Kumar Jena

Romance

4  

Ritesh Kumar Jena

Romance

काश तुम

काश तुम

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काश मेरा घर भी तुम्हारे घर के रस्ते में आता,

तो हर पल तुम्हारे साथ आना-जाना होता।


काश तुम बारिश के बूंदे और मैं छाता होता,

तो हर बारिश में हमारा मिलना होता।


काश तुम हवा होते और मैं पेड़ होता,

तो हर पल तुम्हारे सांसों को महसूस करता।


काश तुम किनारा होते और में समंदर होता,

तो हर बार तुम्हारे करीब आने का बहाना होता।


काश तुम मंजिल होते और में रास्ता होता,

तो हर बार तुम्हें पाने ख्वाइश होता।


काश तुम फूल होते और में मधुमक्खी होता,

तो हर रोज तुम्हें ढूंढ ने का वजहा होता।


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