ज्वार-भाटा
ज्वार-भाटा
समुद्र के जल का चढ़ाव-उतार ज्वार-भाटा कहलाता है।
चंद्रमा-सूर्य का आकर्षण इसका मुख्य कारण कहलाता है।।
ज्वार-भाटा 24 घंटे में दो बार आता है।
प्रति दिन आकर अपना फर्ज़ निभाता है।।
इस करिश्मे को इंसान समझ नहीं पाता है।
मददगार बन कर कुदरत खेल दिखाता है।।
ज्वार-भाटा आने से सहायता प्राप्त होती है।
मछली पकड़ने वालों को बड़ी प्रसन्नता होती है।।
नौका विहार करने में यात्रियों को खुशी होती है।
परमात्मा की आशीर्वाद के रूप में सौगात होती है।।
ज्वार-भाटा दिखाई देता बहुत ही भिन्न है।
इसकी हर क्रिया सच में बिलकुल भिन्न है।।
पृथ्वी सौरमंडल के सभी ग्रहों से अलग है।
इस निराली पृथ्वी की हर बात अलग है।।
ज्वार-भाटा गुरुत्वाकर्षण शक्ति का कमाल है।
इसे देखकर व्यापारियों के खिलते गाल हैं।।
इसे पाकर हर व्यापारी हो जाता मालामाल है।
ज्वार-भाटा आनंदमय हो मिलाता ताल से ताल है।।
