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आरती सिंह "पाखी"

Tragedy Others

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आरती सिंह "पाखी"

Tragedy Others

जरूरी हैं

जरूरी हैं

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नहीं होती हैं साँसों से मुकम्मल ज़िन्दगी,


कुछ गुस्ताखियाँ को करना भी जरूरी हैं।


हम चाहतों का किस्सा कैसे बतला दें तुम्हें,


तेरे दिल में मोहब्बत का होना भी जरूरी हैं।


अभी मौजूद है राहों में तेरे कदमों के निशां,


इन पद् के चिन्हों का मिट जाना भी जरूरी हैं।


धड़कता हैं जो बेहिसाब मेरा दिल तेरे लिए,


इन धड़कनों का थम जाना बेहद जरूरी है।


कैद कर लिया तुझे इन आँखों में इस कदर,


अब आँखों का बंद हो जाना बेहद जरूरी है....!!!


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