STORYMIRROR

Tanha Shayar Hu Yash

Abstract

3  

Tanha Shayar Hu Yash

Abstract

जो मैं जिंदगी के पन्ने पल्टू

जो मैं जिंदगी के पन्ने पल्टू

1 min
217

जो मैं जिंदगी के पन्ने पल्टू 

तो तुमसे नहीं कोई प्यारा है 

तब तुम ही तुम हो मेरी जिंदगी 

अब ये जीवन तनहा बेसहारा है । 


सोचा नहीं था अपने पराए होंगे 

पराए रिश्तों में कितना भाईचारा है 

कुछ ने तो शब्दो के छंद कहें है, कुछ ने 

बिन मांगे डूबती कश्ती को दिया किनारा है 


सबको जो इस दुनिया खुश रख पाए 

ऐसा जीवन यहाँ किसने गुज़ारा है 

इस जीवन के अंत के बाद यहीं पर

मेरा-मेरा कहकर हर किसी ने पुकारा है ।

तनहा शायर हूँ


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract