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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"जनवरी नव अम्बर"

"जनवरी नव अम्बर"

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आखिरकार निकल गया,दिसम्बर

आ गया जनवरी का नव अम्बर

बीत गया,जैसा भी हो,बीता कल

अब उठो,करो वर्तमान स्वागत नर


पुरानी भूलों से लो,सब सबक इधर

नववर्ष नई किरण से मिटाए,अँधघर

नववर्ष में भूल जाये,भूतकाल बर्बर

न ही रखे,आप भविष्य का व्यर्थ डर


आप सिर्फ वर्तमान पर रखे,नजर

सब कुछ जाएगा,बस स्वतः सुधर

जो यहां कोरी बातें,नही करता,नर

वो कुछ करने का यहां रखता,जिगर


जो अपनी कर्मों से मोम कर दे,पत्थर

वो व्यक्ति तो झुका सकता है,अम्बर

इस नववर्ष जाये,हम सब मनु सुधर

ज्यादा से ज़्यादा लगाए,हम तो शजर


कोरोना जैसी न आये बीमारी,भयंकर

प्रकृति बचाने का ले,संकल्प घर-घर

इसबार बचाये जो भी बचे हुए,जानवर

आखिरकार निकल ही गया,दिसम्बर


उठो,जागो,चलो,अपने कर्तव्य की डगर

इस नववर्ष पूर्ण करे,अधूरे लक्ष्य शिखर

गर शुरू से बढ़ा दे,अपने कदम,बिना डर

सच कहता हूं,लक्ष्य प्राप्ति होगी,सुखद


जो व्यक्ति थोड़ा-थोड़ा चलता,निरंतर

वो बिना थके,सफलता का पाता वर

पूरे साल चल सके हम सत्य पथ पर

ऐसी हम सबको ही सत्यशक्ति दे,ईश्वर


इस नववर्ष बुराइयों,को कर दे,बेघर

बुराईयों का सामना करे,होकर निडर

आ गया जनवरी का अब नव अम्बर

परिश्रम से छू लो,इसबार आप अम्बर



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