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Lakshman Jha

Inspirational


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Lakshman Jha

Inspirational


" जमीर "

" जमीर "

1 min 205 1 min 205

कोई बातें नहीं

दीदार नहीं अपनों को 

भूल जाना अच्छा नहीं !


किसी और की बातों पर चलकर

अपनों से दूर जाना ठीक नहीं।


दूर बहुत दूर रहकर इस तरह हमको 

अपनी धरती हमें पुकार रही !

कुछ कर्ज चुकाना है अपने लोगों का 

जमीर हमें भी धिक्कार रही ।


स्वतंत्र रहने के अधिकार का 

ज्ञानवोध हमें जिसने बचपन से दिया !

उसको भूल जाएं कैसे

जिस तरह जो प्यार हमको जीवन में दिया।


बातों और संवादों से ही केवल

हम सब मलिनता दूर कर सकते हैं ! 

जन्म जो देता है इस जग में

उसे मझधार में कैसे छोड़ सकते हैं ? 


आज हैं कल हम ना होंगे 

इस जहाँ में समय सबका कुछ और होगा !

बिखर कर टूट जाएं फुट जाएं

इस धरा पर हाथ फिर मलना पड़ेगा।


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