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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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जलपरी

जलपरी

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गहरे समुद्र तल में मछलियों का एक संसार है

इन्हीं मछलियों के बीच रहता एक अद्भुत किरदार है

अर्थ काया होती जिसकी मानव और अर्ध है मछली समान

सुनहरे बालों वाली इन जलपरियों का कथाओं में वर्णित सार है। 

 

नानी दादी से सुनी हैं हमने कई रोचक कहानियांँ

सागर है राज्य इनका जहाँ राज करती ये जलपरियाँ

कोई ना जान पाया आज तक कि हकीकत है या फ़साना

काल्पनिक ही सही पर सबके मन को भाती हैं ये जलपरियाँ।


पौराणिक कथाओं में भी जिक्र मिलता इनका

सोने की एक जलपरी थी रावण की बेटी स्वर्णमछा

मत्स्य अवतार तो लिया था स्वयं भगवान नारायण ने भी 

महाभारत में भी मिलता उदाहरण अर्जुन की पत्नी उलूपी का।


काल्पनिक इस जलपरी का करते हैं लोग दावा

बच्चे बूढ़े सभी की कल्पनाओं पे रहता इनका कब्जा

चाह कर भी कोई झुठला नहीं सकता इनके किरदार को

मत्स्यकन्या की मात्र कल्पना से ही हर कोई मोहित हो जाता।


अनेक सांस्कृतिक कथाओं का हिस्सा है जलपरी

परियों की तरह ही जादू करती वरदान देती है जलपरी

दया करुणा परोपकार प्रेम इन सभी विशेष गुणों से परिपूर्ण

संगीत प्रेमी एक बेहद ख़ूबसूरत काल्पनिक किरदार है जलपरी।


मासूम सा दिल उसका सबके लिए प्रेम समान

समुद्र से निकलकर सतह पर चाहती अपनी पहचान

अभिलाषाओं और रोमांच से भरी होती हैं इनकी कहानियांँ

हम सब की कल्पना में बसा हुआ है इन जल परियों का जहान।



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