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अमित प्रेमशंकर

Abstract

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अमित प्रेमशंकर

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जिया जाए ना जाए ना तेरे बिन

जिया जाए ना जाए ना तेरे बिन

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जिया जाए ना जाए ना तेरे बिन

एक पल भी ओ साथी रे.

लौट के आ जा तू

साथी रे! प्रिया रे! आ जा रे!

दूर हो क्यूं क्या है खता

जाने जानां इतना बता


दूर हो क्यूं क्या है खता

जाने जानां इतना बता

तेरी कसम मर जाएंगे

हुई जो तू मुझसे खफा...


तेरे सहारे जीवन मेरा

तू ही मेरी सांसों की तार

ये मेरी दिल-ए धड़कन

लौट के आजा तू

साथी रे। प्रिया रे। आ जा रे।

जब तक है धरती गगन

चाहुंगा मैं तुझको सनम


जब तक है धरती गगन

चाहूँगा मैं तुझको सनम

एक नहीं सात नहीं

वादा है ये जन्मों जन्म

रूठ गए जो चांद सितारे

होगी अंधेरी जहां

रे मेरी आस की किरण

लौट के आजा तू

साथी रे। प्रिया रे।आ जा रे।


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