जिंदगी
जिंदगी
जिंदगी मुझे हर बार एक नया सबक सिखाती है।
नादान है तू, क्यों समझ नहीं पाती है।
उम्मीद मत रख किसी से तू, यहां हर ख्वाब धोखा है।
अगर तू यह समझना चाहे तो, किसने तुझे रोका है।
खुद पर यकीन रख, यही तेरे काम आएगा।
हम तेरे अपने हैं ये हर कोई यकीन दिलवाएगा।
थक जाए तू तो कभी मायूस मत होना।
क्या पता कौन कब तुझे आजमायेगा।
धुंधला सा हर ख्वाब लगता है।
यहां हर कोई नकाब में लगता है।
मुझे किस बात का डर सताएग।
जब तू दुनिया में अकेला आया था अकेला ही जाएगा।
मुट्ठी भर के ख्वाब के लिए पूरी जिंदगी खर्च दी।
अंत में जब हिसाब हुआ तो, अठन्नी कम पड़ गई।
