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Rashmika ``રસુ´´ CHAUDHARI

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Rashmika ``રસુ´´ CHAUDHARI

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खामोशी

खामोशी

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उसने कभी मेरी खामोशी को समझा ही नहीं

न उसने मेरे अलफाजों को जाना था कभी।


चलना, गिरना, रुकना फिर चलकर गिरना

ये असूल है सबकी जिंदगी का।


कोई आज किसी के साथ खुश है तो,

कल कोई वक्त के साथ खुश होगा।


तुम मुझे अपना न मानकर ठुकरा सकते हो,

मगर गिरी हुई नहीं कहे सकते।


मुझे, तुझे पाने की कोई ख्वाहिश नहीं,

बस खुद की आजमाइश करती हूं।


ये अगर सच है तो सच ही सही 

के मैं तुझ से मोहब्बत करती हूं।


हो सकता है मेरा चाहना, नागवार हो तुझे,

मगर मेरी तकदीर का अधूरा सा ख्वाब है तू।


जिंदगी के किसी भी मोड़ पर अगर हम मिल भी जाए तो,

नजरे ना छुपा लेना, एक नजर का मैं हर दिन इंतजार करती हूं।


हां यह सच है, मैं आज भी तुझे उतना ही प्यार करती हूं,

रुखसत जब हम इस दुनिया से हो तो, एक पल के लिए अभी जाना।

क्या पता उस दिल में, तुझे देखने के लिए फिर से जाना जाए और वह धड़क उठे।


फिर उसी खामोशी से, जिसे तूने कभी समझा ही नहीं।



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