प्रकृति
प्रकृति
मौसम ने आज रुख बदला देखो ,
प्रकृति ने बदला स्वरूप देखो ।
मन में उठे तरंग को देखो ,
शब्द भी कम पड़ जाए उसका वर्णन करते देखो ।
सभी पुष्प खिल उठे , धरती ने ओढ ली चादर देखो ,
यह मिट्टी की खुशबू मन को मोह लेती है , कितनी यादों को ताजा कर देती है ।
बदला स्वरूप प्रकृति का याद कुछ दिला रहा है , वह छुपी हुई यादों को देखो ।
आकाश की तरफ तरसी नजरें देख रहे , बरसेगी कब बारिश की बूंदे देखो ।
मन मेरा किलोल करता , प्रकृति के सौंदर्य पर मरता,
लहराता मीठे पवन को देखो , देता दिलों को वह ठंडा कर देखो ।
धरती पर हरियाली छा गई , त्योहारों का भी मौसम आ गया।
प्रकृति का एक एक रंग दिल को मोह लेती है , जीवन में देखो जैसे प्राण डाल देती है ।
ये कैसा मौसम आया है ,? प्रकृति ने बदला अपना स्वरूप देखो ।
