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Vimlesh Gautam

Romance

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Vimlesh Gautam

Romance

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

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रोये- रोये बीते दिना

रोये- रोये बीती रैना

परदेशी प्रियतम ना आये

बीत गया सावन का महीना,


नैना थक हारे राह तुम्हारी

प्रियतम पाती ना आयी

ना आये प्रियवर अँगना

सूना बीता सखी रे सावन,


दीवाली में दिल जले

सावन अग्नि रिमझिम बूंदें

होली के सब फीके रंग

हार गयी राह निहारें।।


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