Vishal patil Verulkar
Drama
जिंदगी क्या है
अगर समझ ले सभी
तो आसान हो जाएगा
और भी जीना।
शब्द
जिंदगी
प़्यार
वीर सपूतों
याद
चांद
दुआ
भर दीजिए उदासियों में प्यार की महक- चेहरे पे हंसी बनके सब के मुस्कुराइए। भर दीजिए उदासियों में प्यार की महक- चेहरे पे हंसी बनके सब के मुस्कुराइए।
धूप से रचेगा मंच धूप से रचेगा मंच
सारा कसूर हमारा था हमने ही तो हद से ज़्यादा इश्क़ किया था। सारा कसूर हमारा था हमने ही तो हद से ज़्यादा इश्क़ किया था।
दिल हमारा चोरी करके, तुम कहां चले गये? दिल हमारा चोरी करके, तुम कहां चले गये?
फासलों का ख्याल है जिन्हें, उनमें ही दूरियाँ बढ़ती जा रही है। फासलों का ख्याल है जिन्हें, उनमें ही दूरियाँ बढ़ती जा रही है।
और चाहती है छोटा सा निवाला खैरात के सम्मान का आत्म सम्मान के नाम पर। और चाहती है छोटा सा निवाला खैरात के सम्मान का आत्म सम्मान के नाम पर।
मत तड़पा अब मुझे ओ मेरी स्वप्न सुंदरी। मत तड़पा अब मुझे ओ मेरी स्वप्न सुंदरी।
जब भी चाहूं मैं कुछ कहना ये शब्द कहीं गुम जाते हैं जब भी चाहूं मैं कुछ कहना ये शब्द कहीं गुम जाते हैं
प्रेमी की प्रेमिका छाेड के चली गयी है... तब उसके मन की अवस्था कैसी हाेगी... कभी साेचा है किसीने... ह... प्रेमी की प्रेमिका छाेड के चली गयी है... तब उसके मन की अवस्था कैसी हाेगी... कभी ...
सपनों की उड़ानों से आगे की जीने में अधिकारों से आगे की। सपनों की उड़ानों से आगे की जीने में अधिकारों से आगे की।
छोरों ना यार क्या रखा है कविता सुनाने में। छोरों ना यार क्या रखा है कविता सुनाने में।
इंसान है इंसान रहने की कोशिश में है बेटा दिन में नौकर रात को शौहर ही गया। इंसान है इंसान रहने की कोशिश में है बेटा दिन में नौकर रात को शौहर ही गया।
देखते रहना किसी पर्वत के उतंग शिखर से किंकर्तव्यविमूढ़। देखते रहना किसी पर्वत के उतंग शिखर से किंकर्तव्यविमूढ़।
तुम्हारा स्नेह ही तो मेरी संजीवनी माँ तुम हो तभी मैं हूँ। तुम्हारा स्नेह ही तो मेरी संजीवनी माँ तुम हो तभी मैं हूँ।
तोड़ तटबंध यादों का तूफान उमड़ा चांद मेरा बड़ा बैरी निकला। तोड़ तटबंध यादों का तूफान उमड़ा चांद मेरा बड़ा बैरी निकला।
फिर कौन कहता है कि माँ समझतीं नहीं ? वो माँ हैं जनाब वो सब समझती हैं। फिर कौन कहता है कि माँ समझतीं नहीं ? वो माँ हैं जनाब वो सब समझती हैं।
ए दोस्त, तेरा नाम उस दिन हर पन्ने पर सुनहरे अक्षरों में कुरेदा जाएगा। ए दोस्त, तेरा नाम उस दिन हर पन्ने पर सुनहरे अक्षरों में कुरेदा जाएगा।
कोई और न आएगा आंसू पोंछने, यहाॅं खुद ही रूठना और खुद को मनाना होता है। कोई और न आएगा आंसू पोंछने, यहाॅं खुद ही रूठना और खुद को मनाना होता है।
ये माता की नहीं पिता की बेटियाँ होती हैं। ये माता की नहीं पिता की बेटियाँ होती हैं।
क्योंकि चार बेटों की माँ है चार बहू दस नाती हैं। क्योंकि चार बेटों की माँ है चार बहू दस नाती हैं।