STORYMIRROR

Kamlesh Ahuja

Inspirational

3  

Kamlesh Ahuja

Inspirational

जिंदगी खेल नहीं

जिंदगी खेल नहीं

1 min
300


शामिल न करो ऐसा कुछ भोजन में,

कि विकार उत्तपन्न हो जाएं तन में।


शब्दों के ऐसे तीर न चलाओ कि,

आग सी लग जाए तन बदन में।


जुबां पे ऐसी बात न लाओ कि,

उलझ जाओ किसी उलझन में।


दिल इतना न लगाओ किसी से,

कि जिंदगी गुजर जाए तड़पन में।


जिंदगी खेल नहीं,ये इक व्यवहारिकता है,

सूझ बूझ से जो इसे निभाते,सुखी रहते वो जीवन में।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational