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Brahmwati Sharma

Abstract

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Brahmwati Sharma

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जिंदगी के रंग

जिंदगी के रंग

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जब बिखर जाते हैं रंग जिंदगी के,

परछाइयां छोड़ने लगती हैं दामन,

जब बजती है ,दूर कहीं शहनाई,

जख्म नासूर बन कसकने लगते हैं।


जिंदगी कुर्बान कर दी जिन बहारों के लिए,

उसने फिजा की रंगत मिटा डाली है।

ढूंढते थे आशियाँ तुम्हारी पनाहों में,

लगता है, अब सांसों की नाव डगमगाने वाली है।



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