STORYMIRROR

Keshvi Tyagi

Drama

3  

Keshvi Tyagi

Drama

जिंदगी का सफर

जिंदगी का सफर

1 min
402

ज़िन्दगी का है ये अजीब सफर

अलग अलग रंग दिखाती ये ता उम्र

जब पैदा हुए तो माँ की गोद के लिए रोते हैं

और बुढ़ापे मे माँ बेटे के मोह में तड़पती है। 


जवानी दिखाती कुछ रंगीन पल

जिसमे किसी को नौकरी का शौक

तो किसी की घर बसाने की उमंग

जिंदगी की दौड़ भाग में।


कही छूट ना जाये कोई हसीन पल

ऐ मुसाफिर ना जाने कब मिले तुझे ये पल

बस जीता जा बस जीता जा

ना फ़िक्र कर ना तू संभल।


ना जाने कब मिल जाये तू फिर से इस मिट्टी में

पर इस मिट्टी मे मिलने से पहले

ओढ़ ले इस मिट्टी की खुशबू और

जीता जा ये सफर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama