जिंदगी(1)
जिंदगी(1)
जिंदगी ही सारे काम करायेगी
पसीने से प्यास बुझायेगी
पानी कम नहीं है प्यार का यहाँ
पर गमों से तो अमृत पान करायेगी ।
दिल परिचित हो जाएगी
ये तो बरसात है थम जाएगी
तूफान में जो पर खोले परिंदा
ये उसी से प्यार कर जाएगी ।
जिंदगी ही जीने की जोत जलाएगी
राहें राहत की हमें दिखाएगी
महज एक सपना है की सपनों में कोई अपना
ये तो उसी के द्वारा भी रुलाई जायेगी ।
दिल की बात तो जुबां पर लाना
आसान नहीं है हमें आजमाना
पैर हो पर चले ना परिंदा तो
फिर हमें भी साहब ना बतलाना ।
लचक डाली की कोई कसक है
उधार जीवन में नहीं सुधार है
आधार है कागज का पास भले
जिंदगी जीने का आधार ही क्या है।
मानें या ना मानें मिलते बस तानें
तारे सितारें बने है लिए हमारे
पथ है तो मिलेगा पथिक भी
जिंदगी है नहीं किसी के कथित सी।
कथन है कि कोई पत्तन है
कहीं मगन कहीं छगन है
दिल की तो है बहुत पहल पर
जिंदगी ही वक्त पर विश्वास दिलायेगी ।
मगन व छगन शब्द सुख व दुःख के प्रतीक है ।
