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AKIB JAVED

Abstract

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AKIB JAVED

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जीवन

जीवन

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नदी उतरी पर्वत के पीड़ा से

अंतर्मन में करती ध्वनि


पहुँची जाके मेरे मन में

मन में मेरे बह रही नदी।


जीवन सुख ! दुःख

के डोर को जीवन से


बाँध कर ! नित नई

ऊँचाई से सफलता

प्राप्त कर !


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