STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

Abstract

जीवन का सफ़र

जीवन का सफ़र

1 min
224

जीवन का सफ़र है इक पहिए की तरह

घूमता रहता है जो सदा इक तरह

जन्म से सफ़र जो शुरू होता है

बचपन से बुढ़ापा यही सत्य है

इक बच्चा जाने कब बड़ा हो जाता है

जीवन के आखिरी पड़ाव बुढ़ापे

की ओर बढ़ता जाता है

इक फिर दुनिया को अलविदा कह जाता है

बस इसी तरह यह सिलसिला जारी रहता है

जिंदगी का सफ़र चलता रहता है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract