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Shilpi Srivastava

Abstract


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Shilpi Srivastava

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जीवन का गीत

जीवन का गीत

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मन के भावों में शब्दों का,बीज़ पिरोना भाता है,

जीवन की मधुरिम यादों का,गीत बनाना आता है;

शैशव में मुखरित जिज्ञासा के, जाने कितने पंख लगे,

बाल्यकाल में आकांक्षा के,मोहक पावन फूल खिले;

उन फूलोंकी क्यारी में,जल का सिंचन अभिलाषित है,

फूलों को चुन-चुन कर उनका,हार बनाना आता है;

मन के भावों में ............,

यौवन की सीढ़ी पर चढ़ कर,जीवन रस का आस्वाद मिला,

नयनों को स्वर्णिम स्वप्न मिले,नवगति को नया विहान मिला;

ऊँची-नीची पगडंडी पर,जीवन का सच्चा सार मिला,

इन मिश्रित अनगित बातों का,संज्ञान ही जीवन-दर्शन है,

जो इस विधि में पारंगत है,उसे जीवन जीना आता है;

मन के भावों में शब्दों का,बीज़ पिरोना भाता है,

जीवन की मधुरिम यादों का,गीत बनाना आता है।


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