STORYMIRROR

Avinash Pankaj

Abstract

4  

Avinash Pankaj

Abstract

जीवन और मैं

जीवन और मैं

1 min
41

कशमकश है जिंदगी की साथ तेरे चल रहा हूँ

जिंदगी ख्वाहिशों में साथ तेरे मर रहा हूँ

तू मजे लुटे जहान के

इसलिये मैं तप रहा हूँ 


“तू क्यूँ तपता धुप में है

मैं ना तुमसे कह रही हूँ

छोड़ दे उन्मुक्त मुझको, मैं हवा सी बह रही हूँ

मैं हूँ शक्ति फिर भला क्यूँ शक्ति मुझको देना चाहे ?


मैं हूँ करुणा, मैं हूँ ममता

मोह मैं हूँ, मैं हूँ माया

फिर भला आसक्त हो कर, तू मुझे क्यूँ बांधता है

तू चले गर साथ मेरे पल दो पल का सुख मैं दे दूँ


पर तू चाहे रोकना तो मैं भला कैसे रुकूंगी ?”


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract