STORYMIRROR

मिली साहा

Abstract

4  

मिली साहा

Abstract

जीना सीख लिया

जीना सीख लिया

1 min
430

ज़िन्दगी थोड़ी मुश्किल ज़रूर है पर जीना सीख लिया,

हर ग़म को भुलाकर मैंने अब मुस्कुराना है सीख लिया,


पहेली सी ये ज़िन्दगी एक सुलझी कहानी लगने लगी,

जब से उलझनों को मैंने अलविदा कहना सीख लिया,


खुशियों की धूप खिलखिलाती अब हर पल जीवन में,

जबसे छोटी-छोटी बातों में खुशियांँ ढूंँढना सीख लिया,


किसी की मुस्कुराहट बन सके तो ये जीवन सफल है,

इसलिए इस मुस्कान को औरों में बांँटना सीख लिया,


मुस्कुराहट एक दुआ है, हर ग़म की एक खास दवा है,

इसलिए हर खुशी को मैंने माला में पिरोना सीख लिया,


पल दो पल के इस जीवन में तो खुशियांँ हर क्षण में हैं,

उन क्षणों को खज़ाना समझ बस समेटना सीख लिया,


सुख दुख है इस जीवन का हिस्सा उनसे क्या घबराना,

बस परिस्थितियों को अपनाकर मैंने जीना सीख लिया।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract