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Chetan Gondaliya

Inspirational

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Chetan Gondaliya

Inspirational

जगा अर्ध-चेतन को

जगा अर्ध-चेतन को

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उठ चल

क्यों निराश, हतोत्साह ?

लाचार, निर्बल

हे शक्तिमान,

क्यों बुझे स्वयं को अबल??

तुझ ही में

सारी शक्तियां छुपी है, सबल !

जगा उसको जो स्वयं स्वरूप है

अपने ही अंदर

अर्ध-जाग्रत

समाधी में लीन।

पहुंचा उस तक

अपनी सारी -

इच्छाएं - आकांक्षाएं

गलतियां - निर्बलताएँ।

जगा उसको

वो ही सुलझाएगा,

सारी गुत्थियां।

वो ही बनेगा

तेरी प्रेरणा, तेरा बल।

पहचान स्वयं को

अर्ध-चेतन को जगा, बन चेतन।

जगाने वाले कभी सोते नहीं!

उठ, चल!

फिर हर विजय तेरी है।

तू धीर, वीर, सरल, सबल।


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