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Neena Ghai

Abstract

4.7  

Neena Ghai

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जब जिन्दगी ने कलम थमा दी

जब जिन्दगी ने कलम थमा दी

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  लेखिका तो मैं कभी भी नहीं थी
जिन्दगी ने कछ इस तरह करवट ली
कि लफ़ज खुद-ब-खुद कागज़ पर उतरने लगे
और खामोशियाँ भी कहानियाँ बनने लगीं ।
जो कभी महसूस किया बस दिल में ही
वो अब हर पंक्ति में झलकने लगा
आँखों के कोनों में छिपे जज़्बात
अल्फाज बनकर बहने लगे।
ना इरादा था ,कुछ कहने का
ना कोर्ड ख्वाब था लिखने का
पर वक्त ने यों मोङा रास्ता
कि हर दर्द एक किस्सा बन गया।
अब लिखती हूँ तो लगता है
जैसे खद से ही मुलाकात हो रही हो
हर शब्द में मेरा ही अक्स है।
और हर कहानी  में मेरी ही बात हो रही हो।

नीना घई


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