STORYMIRROR

Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

4  

Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

जब जगेगा भारत-तब बढ़ेगा भारत

जब जगेगा भारत-तब बढ़ेगा भारत

1 min
469

कृषि कानूनों का विरोध तो,

थी एक सुनियोजित चाल।

राजनैतिक अस्थिरता सृजन,

हित फैला रखा था यह जाल।


अशिक्षा और गरीबी से कभी भी,

मुक्त न हो पाए अपना हिंदुस्तान।

ज्ञान दीप जल मिलते ही संसाधन,

नेताओं की हो जाएगी बंद दुकान।


समस्याएं हम हल सिर्फ करते दिखें,

पर है हल करना नहीं देना इनको टाल।

कृषि कानूनों का विरोध तो,

थी एक सुनियोजित चाल।

राजनैतिक अस्थिरता सृजन,

हित फैला रखा था यह जाल।


मुट्ठी भर ही थे इसके विरोधी,

कितने थे इनमें गरीब किसान ?

शिक्षा समझ का गिर रहा है स्तर,

बहुत डिग्रीधारी हैं अनपढ़े समान।


मेहनत करने से अधिकांश हैं डरते,

और चाहते हैं सभी मुफ्त का माल।

कृषि कानूनों का विरोध तो,

थी एक सुनियोजित चाल।

राजनैतिक अस्थिरता सृजन,

हित फैला रखा था यह जाल।


सब पहले समझें निज दायित्व,

उन्हें पूरा करने का रखें ध्यान।

किसी का अधिकार है कर्तव्य,

हमारा भली-भांति लें जान।


हम जानें सब अधिकार हमारे,

पूरे निज दायित्व करें हर हाल।

कृषि कानूनों का विरोध तो,

थी एक सुनियोजित चाल।

राजनैतिक अस्थिरता सृजन,

हित फैला रखा था यह जाल।


सरकार कानून करेंगे हित उनका जो,

जागरूक और शक्तिशाली है इंसान।

शक्ति बढ़ा हम उसे परहित में लगाएं,

भाई-भाई हैं जग में सब हैं एक समान।


विशेष प्रयोजन हेतु आए हम जग में,

न छोड़ें हम एक क्षण भी यह ख्याल।

कृषि कानूनों का विरोध तो,

थी एक सुनियोजित चाल।

राजनैतिक अस्थिरता सृजन,

हित फैला रखा था यह जाल।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract