STORYMIRROR

chandraprabha kumar

Inspirational

4  

chandraprabha kumar

Inspirational

जैसा सोचो वैसा बनो

जैसा सोचो वैसा बनो

1 min
318

  

अंदर की ताक़त को जगायें

वही हमें आगे बढ़ाती है,

तुम स्वयं अपनी कमियां देखते हो

हीन नहीं हो तुम किसी से भी। 


न दें किसी को इजाज़त

कि वह समझे आपको कमज़ोर ,

दुख और समस्याओं को चुनौती बना लें

उनसे सामंजस्य बैठाना सीख लें।


लें वरदान की तरह जीवन को

भरोसा रखें उम्मीद और उत्साह में,

दुनिया तुम्हारे गुण देखती है 

क़ायल होती है तुम्हारी सफलताओं की। 


अपनी कमियों को जानना उन्हें दूर करना

पर अपनी शक्तियों को भी पहचानना ,

न पनपने दें किसी कमी का एहसास 

न कम आंकलन करें अपनी बुद्धि का। 


सामने वाला नहीं है उतना बुद्धिमान्

जितना आप उसे समझते हैं,

अपनी उच्च योग्यता को पहिचानें

बेहतर उपयोग करें अपनी शक्ति का। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational