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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Abstract

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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

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जाने दो

जाने दो

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बेसहारा बेसब ज़िन्दगी को यूँ ही बह जाने दो

डगमगाती जीवन की कश्ती को यूँ ही डूब जाने दो !


अँधियारी सी ये ज़िन्दगी कोई नहीं रोशन करेगा

मत आओ करीब हमारे तन्हा समय बिताने दो !


जिस दिन टूटेगी ये माला मेरी आती जाती श्वाँसों की

टाँग कर तस्वीर पर माला दीवारों पर सजने देना।


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