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Rishabh Katiyar

Abstract

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Rishabh Katiyar

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जान जाओगे?

जान जाओगे?

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किसी के साथ दूर तक जाकर तो देखो!

अकेले लौट के आना कितना मुश्किल होता है जान जाओगे


किसी के साथ कुछ पल बिता कर तो देखो!

अकेले रहना कितना मुश्किल होता है जान जाओगे


महफिल में सब के साथ रो कर तो देखो!

अकेले हँसना कितना मुश्किल होता है जान जाओगे


दिये रास्ते के सारे बुझा कर तो देखो!

अंधेरे में मंजिल ढूंढना कितना मुश्किल होता है जान जाओगे


इन अमीरी की जेलों से बाहर झांक कर तो देखो!

पेट के लिए हुनर सड़कों पर तमाशा करता है जान जाओगे


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