जादू
जादू
लगती कभी है जादू
तो लगती कभी पहेली ।
कविता तेरी जानी पहचानी दुनिया
लगती जैसे हो सखी सहेली।
बन जाती कभी मां, दादी ,नानी की जुबानी
बनती कभी लोरी के बोल।
कविता तेरी जानी पहचानी दुनिया
जैसे हो खेतों के ढोल।
होती है निकट संवेदना के
छू जाती है मन के तार।
कविता तेरी जानी पहचानी दुनिया
जाने हैं सारा संसार।
