जादुई चिराग मोबाइल
जादुई चिराग मोबाइल
मजबूरियों के कारण दूर तो जाना पड़ा
फर्ज तो निभाना ही था तो
ये कदम भी उठाना पड़ा
दूर रहकर चिट्ठी से हाल चाल जान लिया
अगली चिट्ठी आने तक पुरानी से
काम चला लिया
फिर करवट ली समय ने एसी
विज्ञान की धूम मच गई हो जैसे
फोन का नया उपहार देकर
बाँध लिया सबको इक धागे में जैसे
स्पीड बढकार विज्ञान ने कुछ ऐसा
सपना सच कर दिखाया
जैसा कभी हम जैसों ने कभी
सपने में भी न था देखाभाला
मोबाइल देकर मानो दे दिया जा
हाथ में जादू का जिन्न
कुछ भी अपनी इच्छा इसे बताओ
पूरी होगी उसी छिन्न (क्षण)।
