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SHA AZAM SIDDIQUI

Romance

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SHA AZAM SIDDIQUI

Romance

इश्क़ था या था नही

इश्क़ था या था नही

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इश्क़ था या था नही

बाते थी कुछ अनकही


जब लगे चलने 

इश्क़ के सफ़र मे


थी खुबसूरत राहे

और थी अधुरी सौगातें


अधूरा सफ़र पूरा करने

चल पड़े थे अनदेखी राहों में सफ़र करने


मज़ा आया जब सफ़र पूरा हुआ

वो न मेरे और ना मै किसीका हुआ।


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