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SHA AZAM SIDDIQUI

Others

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SHA AZAM SIDDIQUI

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निगाहों से

निगाहों से

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यह निगाहों से

हर बार वो सितम कर जाते थे


हम थे यहाँ

बस आहें भरते जाते थे


कहना था बहुत कुछ 

लेकिन लफ्ज़ मन में ही ठहर जाते थे



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