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Rukhsar parveen

Romance

3  

Rukhsar parveen

Romance

इश्क़

इश्क़

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इश्क़ दरिया है 

मुंतजिर है तुम्हारा

रात कट गई कांटों पर

इंतेज़ार है तुम्हारा

बेशक रुठो 

पर मान भी जाना

इश्क़ है तुमसे

दूर न जाना

बात जो तुममें है

वो किसी और में कहां

तुम सा इस जहां में

और कहां


वक्त के साथ जो बढ़ता गया

वो प्यार है तुम्हारा

अब तो मान जाओ

ये इश्क है जानां 



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