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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Inspirational

इस साल

इस साल

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आओ हम सब मिलकर करें इस साल एक नयी पहल।

संकल्प ले खड़ा करे संस्कारों का सुखद महल।


जहां जात-पांत, छोटे-बड़े भेद-भाव का मान न हो।

ईर्ष्या, द्वेष, काम, क्रोध, लोभ का किंचित न भान हो


जहां योग-प्राणायाम से सुसज्जित नव बिहान हो।

होती संध्या वृक्षों में पखेरुओं का मधुर कलरव गान हो। 


हर घर में जन्मदाता ही जन-जन का श्रद्धेय भगवान हो।

स्वस्थ आभा से चमकती मुस्कान ही अपनी पहचान हो।


जीवन मूल्यों को स्थापित कर नव आशा दीप जलाएं।

भटकते को राह दिखा अपने प्यार का सागर लहलहायें।


देश-प्रेम का ही ले बीड़ा जियो और जीने दो का मूलमंत्र अपनायें।

नारी को सम्मान दे ,जीवन निखारने मे व्यस्त हो जायें।


न कोई भूखा मानव हो , न कलियों को रौंदने वाला दानव हो।

स्नेहासिक्त अपनेपन के प्रेम-सरोवर से सिंचित हर मानव हो।


आओ हम सब मिलकर करें इस साल एक नयी पहल।

संकल्प ले खड़ा करे संस्कारों का सुखद महल।



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