SANJAY SALVI
Romance
हम भी थे कुछ काम के,
हम भी थे कुछ नाम के,
कुछ इस कदर बदनाम हुए,
जुड़ के तेरे नाम से,
ढूंढते हैं गली गली,
ढूंढते हैं शहर शहर,
कहीं तो मिलोगी तुम,
कोई तो बताएगा घर,
थम गए हैं रास्ते,
हम नहीं थके मगर,
अब आखिरी एक आस है,
बैठे है इंतजार में,
कब्र अपनी खोदकर।
तुम मेरे हो..
तुम चाहो या न...
सुहाना सफ़र..
सिलसिला.
सावन
चाहत
मेरे खुदा
“मयखाना”
माया
एक बार जरा सा कह दो तुम मैं हवा सा बहता आ जाऊंगा, एक बार जरा सा कह दो तुम मैं हवा सा बहता आ जाऊंगा,
मेरा दिल चुराकर ले गई , नशीली नजर आपकी मेरा चैन चुराकर ले गई , कंटीली नजर आपकी। मेरा दिल चुराकर ले गई , नशीली नजर आपकी मेरा चैन चुराकर ले गई , कंटीली नजर आप...
मैं मुग्ध वसन में लिपटा था तुम लज्जा से इठलाई थी, मैं मुग्ध वसन में लिपटा था तुम लज्जा से इठलाई थी,
कईसे लूटी सावन के बहार हो। सवनवा में ना अइबो ननदी। कईसे लूटी सावन के बहार हो। सवनवा में ना अइबो ननदी।
जो बोया है वो एक दिन जरूर काटोगी! पछताओगी बहुत एक दिन ख़ुद को डांटोगी!! जो बोया है वो एक दिन जरूर काटोगी! पछताओगी बहुत एक दिन ख़ुद को डांटोगी!!
जिसकी खातिर मैं दर-दर भटकता रहा । रात दिन मेरे अंदर वो बैठा रहा ।। जिसकी खातिर मैं दर-दर भटकता रहा । रात दिन मेरे अंदर वो बैठा रहा ।।
आज अकेले खड़े उन राहों में जहाँ कभी साथ था तुम्हारा ! आज अकेले खड़े उन राहों में जहाँ कभी साथ था तुम्हारा !
अधिकार, भारतीय नागरिक के स्वरूप में..! अधिकार, भारतीय नागरिक के स्वरूप में..!
रहिया तकत मोर छछने परनवा। काहे भूली गइला हमके सजनवा। रहिया तकत मोर छछने परनवा। काहे भूली गइला हमके सजनवा।
वह यादें हमसे कोसों दूर रहकर भी हमको तड़पाती हैं। वह यादें हमसे कोसों दूर रहकर भी हमको तड़पाती हैं।
छा गई हरियाली देखो, फूल भी हैं खिल गए। गुनगुनाते भौंरे भी आ कर, कलियों से देखो मिल गए। छा गई हरियाली देखो, फूल भी हैं खिल गए। गुनगुनाते भौंरे भी आ कर, कलियों से देख...
वो यादें अब धुंधली हो चुकी है पर याद आती है। वो यादें अब धुंधली हो चुकी है पर याद आती है।
वो राजकुमारी राधा सी मैं कृष्ण कहां बन पाया हूं..। वो राजकुमारी राधा सी मैं कृष्ण कहां बन पाया हूं..।
कौन दीपक बन हृदय में जगमगाता है? कौन है जो द्वार मन के खटखटाता है? कौन दीपक बन हृदय में जगमगाता है? कौन है जो द्वार मन के खटखटाता है?
मेरा भी उसके घर तब ही जाना होता था, होली या दीवाली हो त्योहार बहाना होता था, मेरा भी उसके घर तब ही जाना होता था, होली या दीवाली हो त्योहार बहाना होता था,
झूम झूम यूँ धरती गाती गीत रे, जब धरा पर रिमझिम बरसे प्रीत रे. झूम झूम यूँ धरती गाती गीत रे, जब धरा पर रिमझिम बरसे प्रीत रे.
तुझसे शुरू होकर, तुझमे ही खत्म हो जाने की। तुझसे शुरू होकर, तुझमे ही खत्म हो जाने की।
दर्द हुआ है पर ऐसा नहीं की चाहत नहीं है। दर्द हुआ है पर ऐसा नहीं की चाहत नहीं है।
थक गया हूं जिंदगी की राह पे चलते चलते थक गया हूं जिंदगी की राह पे चलते चलते
कि जब वो आकर मुझे अपने हाथों में भरेगा मैं मुक्त हो जाऊँगी। कि जब वो आकर मुझे अपने हाथों में भरेगा मैं मुक्त हो जाऊँगी।