STORYMIRROR

Shishpal Chiniya

Abstract Romance Fantasy

4  

Shishpal Chiniya

Abstract Romance Fantasy

इंतजार 1

इंतजार 1

1 min
201

कैसे करूँ ये दर्द बयां अब, हर बार यही जो मिलता है।

इंतजार, इंतजार, इंतजार, हर बार यही जो मिलता है।


आदत हो गई लम्हें -लम्हें जीने की,हर लम्हें में जीने की

हर बार मरूँ कैसे,हर लम्हे, हर बार यही जो मिलता है।


नस-नस में बसा है इश्क़ तेरा, हर बूंद लहु की कहानी है।

जब चलती है सांसे मेरी, हर जिस्म-हिस्से की कहानी है।


क्यों करता है कत्ल खुद का, न सांस लेता है अपने लिए

न नस बहती है तेरे लिये, ये मेरे ही जिस्म की जुबानी है।


गम की बहुत विशाल ईमारत बना ली, तूने इसी सफर में।

उम्र कम, तुजुर्बा कम है, फिर भी है अकेला इसी सफर में।


हर बार कहते डरता है दिल, क्यों इसकी जड़ें मजबूत इतनी

गिरनी चाहिए थी ये ईमारत, जल्द जीवन के इसी सफर में।


बुरा है हाल -ऐ- दिल, अब चेहरा हर गम छुपा नहीं पाता है।

दिख जाता है तनिक सा, जिस्म हर गम छुपा नहीं पाता है।


खुद से सवाल कई थे और रहेंगे अब उम्र के हर सांचे में

दिल अब हर सवाल- जवाब का हर गम छुपा नहीं पाता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract