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AKIB JAVED

Inspirational

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AKIB JAVED

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इंसानियत प्यार का पैगाम है

इंसानियत प्यार का पैगाम है

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मुँह में राम, नाम बदनाम है

वो ही अल्लाह और राम है

बेच कर ईमान लड़ते हो

बताओ क्या अब अंजाम है

धरती एक, एक ही अम्बर

इंसानियत क्यूँ यूँ बदनाम है


लोग अक्सर चुना लगाते

क्या ये भी एक इलज़ाम है

हर तरफ़ आ रहा है नज़र

बिक रहा जो खुले आम है

आरोप प्रत्यारोप चलते रहे

कैसी तारों भरी शाम है


मुनासिब हो तो समझा लो

इंसानियत प्यार का पैगाम है

वोटों के ख़ातिर बाँट रखा

सियासत का यही काम है

ज़िन्दगी के तूफान समेटो

इसमें कभी नहीं आराम है


तवक़्क़ो नहीं तुझसे कोई

अब काम धाम सब जाम है

लड़ते हो क्यूँ मंदिर मस्जिद पे

क्या अब दुश्मनी सरे आम है

 


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