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Manoj Kumar

Romance Thriller

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Manoj Kumar

Romance Thriller

इक तसवीर के खातिर मैं

इक तसवीर के खातिर मैं

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कल देखा था सपने जो

वही मैं आज पाता हूँ

इक तसवीर के खातिर मैं

आँसू पन्ने पे बोता हूँ!!


वो भूल गए रात सुहानी

जब मैं उनसे मिलता था

इक छोटी सी ख्वाहिश लेके

दिल  पे दस्तक देता था।


आसमां पे पैर था मेरा

लब पे खुशियाँ रहती थी

उनका बुलावा खुमार था

जब वो मुझसे मिलती थी।


उनकी याद में आज भी  

उनका दर्द संजोता हूँ।

इक तसवीर के खातिर मैं

आँसू पन्ने पे बोता हूँ।


वो बहुत ज़रूरी मिलन थी

जब उनसे प्यार करता था

वो मेरी आँखें पागल थी

जो उसके पीछे भागा था


क्या बताएँ वो पुरानी बातें

अब तो हद से भी ज्यादें है

आज हर लम्हें के खातिर

अश्क पेजो पे शरमाते हैं


मैं जब भी उसका नाम लूँ

मैं सबकुछ भूल जाता हूँ

इक तसवीर के खातिर मैं

आँसू पन्ने पे बोता हूँ।।


वो मैं सरफिरा अकेला था

जो उसका दर्द मैं झेला था

मेरे माथे पे गम का टुकड़ा

जो उसके प्यार में खेला था


वो कितना मुझपे मरते थे

बात- बात पे झगड़ते थे

हर पैकेट में खुशियाँ थी

जब दोनों फाड़के खाते थे।


जब ये बाते सोचता हूँ

मैं खुद रो पड़ता  हूँ

इक तसवीर के खातिर मैं

आँसू पन्ने पे बोता हूँ


मैंने माँगा था इक तसवीर

कहाँ था बातें करेंगे तुझसे

पर खुदाया ने किया करम

जो कभी मिल ना सकें उनसे


मैंने  माँगा था  दुआवों  में

आज है साथ, कल पास रहेंगे

वो सोचना मुझे शातिर  हुआ

जो  उम्मीदें  थी  खास  रहेंगे


मैं जब भी ढूँढू रूह में

उस वक्त में खो जाता हूँ

इक तस्वीर के खातिर मैं

आँसू  पन्ने  पे बोता  हूँ।


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