STORYMIRROR

Ms. Nikita

Abstract Others

3  

Ms. Nikita

Abstract Others

ईर्ष्या

ईर्ष्या

1 min
26

जला देती है

मानव को

भीतर से

जला देती है

इच्छा अंतर्मन से

जला देती है

मानव की

मानवता को

न छोड़ती है

मानव को

मानव-सा

न देती है

साथ किसी

कष्ट में

ये ईर्ष्या ही

तो है

जो छीनती कम

और खत्म

अधिक करती है


घुटता मानव रहता है

खो कर अपनी

छाया में और

डूब कर रह जाता है

मृत्यु की माया में॥ 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract