इबादत
इबादत
रब की इबादत करने में
सलीक़ा शायद सही न था
इबादत अगर सही होती
रब का हमें दीदार होता
ता-उम्र इबादत मन से की
हर जगह उनको हमने ढूँढ़ा
न हो सके रूबरू उनसे
एहसास से हमें मलाल हुआ
पैगाम उनका था हमें मिला
इबादत में कोई कमी न थी
वो हर पल साथ हमारे थे
हम ही उन्हे न पहचान सके।
