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Yogeshwar Dayal Mathur

Abstract

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Yogeshwar Dayal Mathur

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इबादत

इबादत

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रब की इबादत करने में 

सलीक़ा शायद सही न था 

इबादत अगर सही होती 

रब का हमें दीदार होता 


ता-उम्र इबादत मन से की 

हर जगह उनको हमने ढूँढ़ा 

न हो सके रूबरू उनसे 

एहसास से हमें मलाल हुआ 


पैगाम उनका था हमें मिला 

इबादत में कोई कमी न थी 

वो हर पल साथ हमारे थे 

हम ही उन्हे न पहचान सके। 


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