STORYMIRROR

Rahul Yadav

Tragedy

2  

Rahul Yadav

Tragedy

हवस के पुजारी

हवस के पुजारी

1 min
513

हवस के पुजारियों

इंसानियत का

कर दिया है बुरा हाल

स्त्री जाति कराह रही है

तुम्हारे अत्याचार से

मानवता शर्मशार है


तुम्हारे व्यवहार से

उम्मीदों का जलता दीप

बुझा कर जश्न मानते हो 

इंसान तो नहीं हो,

पशुता की मोहर लगाते हो


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy