STORYMIRROR

Rahul Yadav

Others

3  

Rahul Yadav

Others

इत्तेफ़ाक से

इत्तेफ़ाक से

1 min
232

जिसे ना थी मेरे प्यार की कदर  

इत्तेफ़ाक से उसी को चाह

रहे थे हम

ना मंज़िल थी ना कोई मुकाम था  

गुमनामी की रहो पर बेपरवाह

जा रहे थे हम


फरेबी था बेवफ़ाई थी जिसके

ज़हन में

उसी की चाहत में दिल में

सुलगती आग आँसुओं से

बुझा रहे थे हम


जो था मुहब्बत की रौशनी

से बेखबर

उन्ही की इबादत में जज्बातों की

समां जला रहे थे हम

मिटा दी जिसने मेरे आरजू की तस्वीर  

उसी फरेबी को दिल की

दुकान में सजा रहे थे हम


Rate this content
Log in