Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Suchita Agarwal"suchisandeep" SuchiSandeep

Abstract


4  

Suchita Agarwal"suchisandeep" SuchiSandeep

Abstract


हवाई यात्रा के दौरान

हवाई यात्रा के दौरान

1 min 204 1 min 204

दूर गगन से देखा, 

मैंने आज,

सभी सितारे नीचे, 

गाये साज,

स्वर्ग धरा पर आया, 

उजली रात,

रिमझिम सोना बरसे,

 ज्यूँ बरसात।


हुआ आसमाँ फीका, 

शून्य अनेक,

टकरा कर के जाता, 

घन प्रत्येक,

चिंतन चित्र बनाये, 

पल का साथ,

टिमटिम तारा आया, 

है कब हाथ।


हरी- हरी सी गलियाँ, 

छोटे खेत,

भवन खिलौने दिखते, 

उजली रेत,

नन्हीं-नन्हीं सड़कें, 

छोटे लोग,

अद्भुत सृष्टि का है, 

यह संजोग।


मन धरती ने मेरा,

मोहा आज,

आसमान के सारे, 

खोले राज,

चकचौन्ध है झूठी,

धरती श्रेष्ठ,

देवों ने भी पाया, 

इसको ज्येष्ठ।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Suchita Agarwal"suchisandeep" SuchiSandeep

Similar hindi poem from Abstract