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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

हरियाली अमावस

हरियाली अमावस

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जब आता हरियाली अमावस त्यौहार है

हम सबके हृदय में घोलता रस अपार है

प्रकृति ओढ़ती आज हरी चुनर ख़ास है

प्राकृतिक दृश्य देख बड़ा आंनद आता है


हम भूल जाते है, कि हम कितने उदास है

प्राकृतिक दृश्य की होती ऐसी भरमार है

मन, खिंचता प्रकृति की ओर अनायास है

जब आता हरियाली अमावस त्यौहार है


मालपुए, पकौड़ी याद आती बार-बार है

झरनों की कलकल, पर्वत सुंदर दृश्य से,

मन का बज जाता, हर बार ही गिटार है

हृदय के भीतर उमड़ता ऐसा पारावार है


जैसे कहीं सितारों का हुआ अविष्कार है

मन के मयूर को मिल जाते पंख अपार है

प्रकृति का जब-जब होता सुंदर श्रृंगार है

आज प्रकृति दुल्हन का लेती अवतार है


जब आता हरियाली अमावस त्यौहार है

हम सबके हृदय में रस घोलता अपार है

आज के दिन सब ख़ूब लुत्फ उठाओ,

प्रकृति में समाया हुआ स्वर्ग सा संसार है


प्रकृति के पास हर सवाल का जवाब है

जब आप चहुँओर से हो जाओ निराश है

जिंदगी जीने की नही बची कोई आस है,

प्रकृति मां की गोद मे जाकर सो जाओ,


प्रकृति में हमे मिलेगा मां जैसा दुलार है

हर चिंता का प्रकृति के पास ईलाज है

यह हरियाली ही प्रकृति मां की सांस है 

हरियाली से ही चल रही हमारी सांस है


धर्म से जोड़कर बनाया इसलिये खास है

ताकि हम लोग प्रकृति की महत्ता समझे,

क्योंकि जो मनु रहता प्रकृति के पास है

उसका जरूर होता सर्वांगीण विकास है


जब आता हरियाली अमावस त्यौहार है

हम सबके हृदय में घोलता रस अपार है

हरियाली अमावस का मजा ही खास है

इससे आत्मा की बुझती साखी प्यास है।


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